छत्‍तीसगढ़: नक्सलियों की धमकी के बाद 4 आदिवासी परिवारों ने छोड़ा घर

पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में अपनी सर्चिंग बढ़ा दी है. नक्सलियों की हर एक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. उधर, नक्सली भी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में जुटे हैं.

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नक्सलियों की 4 आदिवासी परिवारों को धमकी, डर से छोड़ा घर नक्सलियों की 4 आदिवासी परिवारों को धमकी, डर से छोड़ा घर

दीपक कुमार / सुनील नामदेव

  • रायपुर,
  • 29 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 7:23 PM IST

छत्‍तीसगढ़ के कोंडागांव में नक्सलियों की धमकी के बाद चार आदिवासी परिवारों ने अपना घर छोड़ दिया है. दरअसल, हाल ही में नक्सलियों ने जनअदालत लगाकर चार परिवारों के कुल 24 सदस्यों को फांसी की सजा देने की धमकी दी थी. नक्सलियों ने इन लोगों पर पुलिस की सहायता और मुखबिरी करने का आरोप लगाकर यह सजा सुनाई है.  

ये सभी आदिवासी नारायपुर जिले के छोटाडोंगर इलाके के स्थाई निवासी बताए जा रहे हैं. पीड़ित ग्रामीणों के मुताबिक 27 जुलाई की रात नक्सली कमांडर सरिता अपने दल बल के साथ गांव पहुंची थी. कुछ देर में उसने जन अदालत लगाई और उनके परिवार के सभी सदस्यों को फांसी पर लटकाने की सजा सुनाई. जैसे-तैसे उन्होंने माफी मांगी और मौके से भाग निकले. पूरी रात पीड़ितों ने जंगल में पैदल सफर तय किया और तड़के सुरक्षाबलों की शरण में पहुंच गए.  

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दरअसल, नक्सलियों का शहीद सप्‍ताह शुरू हो चुका है. ये हर साल 28 जुलाई से 3 अगस्त तक इसे मनाते हैं. इस दौरान वह अपने पुराने मारे गए साथियों को याद कर कई हिंसक वारदातों को अंजाम देते हैं. कोंडागांव में 3 लाख ईनामी राशि का हार्डकोर नक्सली बालकु ने शहीद सप्ताह के दौरान आत्मसमर्पण कर नक्सलियों को और बौखला दिया है. उस पर हत्या और आगजनी के 22 मामले दर्ज हैं. नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में NMDC किरंदुल स्थित एक पंप हाउस में दाखिल होने की कोशिश की थी, लेकिन सुरक्षाबलों ने उसे नाकाम कर दिया.  हालांकि नक्सलियों ने इस इलाके में NMDC के एक बोलेरो वाहन आग के हवाले कर दिया.

वहीें सुरक्षा के मद्देनजर बस्तर के जंगलों के भीतर बसे गांवों में आवागमन ठप कर दिया गया है. बसों और दूसरे यात्री वाहनों को आग के हवाले करने के अंदेशा की वजह से वाहन मालिकों ने हफ्तेभर तक यात्री सेवाए बंद कर दी है. यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने बस्तर से विशाखापट्नम जाने वाली सभी यात्री गाड़ियों को 3 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया है. इस मार्ग पर सिर्फ दिन में ही मालगाड़ी का परिचालन होगा. नक्सलियों ने पिछले दिनों यात्री गाड़ियों को निशाना बनाया था. इसलिए रेलवे जोखिम लेना नहीं चाहता है.

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हाल ही में 25 जुलाई को नक्सलियों ने कामालूर रेलवे स्टेशन के बाहरी इलाके में 130 मीटर पटरी उखाड़ दी थी. दो दिन पहले जगरगुंडा मार्ग पर पोलमपल्ली थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने बैनर पोस्टर लगाकर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों को चेतावनी दी है. नक्सलियों ने बैनर पोस्टर के नीचे पांच किलो का IED भी प्लांट किया था. लेकिन सुरक्षाबलों की सतर्कता से नक्सलियों के मंसूबों पर पानी फिर गया.

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